माता के इस मंदिर में पूजा करने के लिए जंगल से आता है भालू का पूरा परिवार, जानिए क्यों

यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि केवल इंसान के अंदर ही भक्ति की भावना होती हैं। बल्कि कुछ जानवरों के अंदर भी भक्ति की भावना देखी गई हैं। आपने कई पालतू जानवरों के अन्दर भक्ति भावना होती है। कई बार देखा गया है कि कई पालतू जानवर  किसी- किसी दिन खाना ही नहीं खाते हैं। मनुष्य जैसे उपवास रखता है ।ठीक उसी प्रकार वो भी उपवास करते हैं। भगवान  शंकर जी के मंदिरों में कई बार साँपों को देखा गया है। वे भी भगवन शंकर की भक्ति की वजह से ही वहाँ आते हैं। देखा जाए तो ऐसा कई उदाहरण देखने को मिल जाएगा। जो यह साबित करता हैं कि जानवरों में भी भक्ति-भावना होती है।



आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बतायेंगे। माता चंडी का मंदिर के मंदिर के एक ऐसी जगह है जहाँ पर एक भालू अपने पुरे परिवार के साथ पूजा करने के लिए आता है। हैरानी की बात यह है कि भालू मंदिर से प्रसाद लेकर चुपचाप फिर जंगल में चले जाते हैं। माता चंडी का यह मंदिर छत्तीसगढ़ में महासमुंद जिले के बागबहरा से पांच किलोमीटर दूर जंगल में है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए लोग बहुत दूर- दूर से आते हैं। यहां नवरात्री के समय बहुत भीड़ लगती है। इसी भीड़ में ही भालू का परिवार पूजा करने के लिए शामिल होते हैं। भालू अपने पुरे परिवार के साथ माँ चंडी के दर्शन के वापस जंगल में चले जाते हैं।



बता दें कि भालुओं के परिवार का मुखिया मंदिर के मुख्य द्वार पर बैठ जाता है और बाकी पूरा परिवार मंदिर में  पूजा करने के लिए चला जाता है। मंदिर में सभी भालू परिक्रमा करते हैं और शांति से प्रसाद लेकर बाहर निकल जाते हैं।भालुओं के इस झुण्ड में एक नर, एक मादा और उसका एक बच्चा है। इस पर मंदिर के पुजारी का कहना है कि यह भालू बहुत समय से यहाँ आ रहे हैं और शांति से पूजा करके प्रसाद लेकर चले जाते हैं। लोग आस्था से उन भालुओं को प्रसाद और कुछ चीजें खिलाते हैं।भालुओं के इस परिवार ने अब तक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया है। लोगों का कहना है कि जंगल के इस मंदिर में देवी माँ की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी।मंदिर लगभग 150 साल पुराना है। आज भी लोगों के लिए यह आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है।