बाप गैराज में चलाता था छोटा सा बजनेस, बेटी ने उसे फैलाकर खड़ा किया 3000 करोड़ का कारोबार

डॉ सुशील शाह भारत की वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ अलग करना चाहते थे। ऐसे में संयुक्त राज्य अमेरिका से लौटने के बाद उन्होंने ‘सुशील शाह प्रयोगशाला’ नामक पैथोलॉजी खोली। शुरुआत उन्होंने गैरेज में की। वे अपने समय के पहले ऐसे डॉक्टर थे जो हेल्थ की दुनिया में प्रयोगशाला तकनीक को लाए थे। हालांकि उनके तरीके और तकनीक थोड़ी पुरानी थी। ऐसे में बेटी समीरा फरिश्ता बनकर आई।

अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय से स्नातक समीरा ने बहुराष्ट्रीय फर्म गोल्डमैन फाउंडेशन के अपने करियर की शुरुआत की थी। फिर 2001 में वह भारत वापस आ गई। तब देश में सूचना प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी जैसी चीजें कम थी। वहीं उनके पिता अपनी प्रयोगशालाओं की एक सीरीज पूरे हिंदुस्तान में बिछाना चाहते थे। लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी तकनीक और तरीके आउटडेटेड थे।



समीरा ने डिजिटल संचार के साधनों का इस्तेमाल कर पिता के सपने को पूरा किया। उन्होंने ‘डॉ, सुशील शाह प्रयोगशाला का नाम बदलकर ‘मेट्रोपोलिस हेल्थ केयर’ रख दिया। जल्द इसकी श्रंखलाएं न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी फैल गई। वर्तमान में उनकी कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी पैथोलॉजी लैब में से एक है।



मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर व्यवसाय 25 से ज्यादा देशों में फैला है। इसमें 4,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। बेटी ने पिता की एक छोटी सी लैब को 3,000 करोड़ रुपये की कंपनी बना दिया।