फीस भरने के लिए गरीब पिता ने बेची थी जमीन, बेटी ने IAS बन किया नाम रोशन

इंसान जब कुछ कर दिखाने की ठान ले तो दुनिया की कोई ताकत उसे नहीं रोक सकती है। फिर ये गरीबी क्या चीज है। अब ग्वालियर के इलेक्ट्रिशियन रविन्द्र सिंह सेंगर की बेटी उर्वशी सेंगर को ही ले लीजिए। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) में 532वीं रैंक लाकर पिता का नाम रोशन कर दिया। ये उनका तीसरा अटेम्प था। 2017 और 2019 की अटेम्प में वह प्रीलिम्स क्वालिफाई नहीं कर पायी थी।

उर्वशी यूपीपीएससी की एग्जाम भी क्लियर कर चुकी थी। इसमें उनकी 54वीं रैंक आई थी। उन्हें एसडीएम का पद भी मिला था। हालांकि उनका सपना यूपीएससी की परीक्षा क्रैक करना था इसलिए उन्होंने एसडीएम की नौकरी ज्वाइन नहीं की।



उर्वशी हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ी थी। उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वह दिल्ली में एक रिश्तेदार के यहां रही। कोचिंग की फीस के पैसे नहीं थे तो वहीं एक पार्ट टाइम जॉब कर ली। उधर गरीब पिता ने बेटी की पढ़ाई-लिखाई के लिए अपनी एक छोटी सी जमीन तक बेच दी थी।

सही गाइडेंस न मिलने की वजह से उर्वशी को शुरुआत में बहुत दिक्कतें आई। लेकिन परिवार की शक्लों ने उन्हें प्रेरित किया। वह उन्हें निराश नहीं करना चाहती थी। इसलिए वह अपनी सफलता का क्रेडिट भी पिता रविंद्र सिंह सेंगर और मां संतोष सेंगर को देती हैं।



ग्वालियर के बादलगढ़ स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से पढ़ी उर्वशी ने 2015 में बीएससी और भूगोल से पीजी पास किया है। उनकी बहन आयुषी सेंगर की शादी हो चुकी है। वहीं छोटा भाई आदित्य सेंगर आईआईआईटी नागपुर से कम्प्यूटर साइंस से बीटेक कर रहा है। इसके अलावा छोटी बहन ज्योति सेंगर फ्रूट सांइस से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही है।

उर्वशी समय को भगवान मानती थी। उन्हें इंटरव्यू वगैरह से डर नहीं लगता था। बल्कि वह इसे लेकर बहुत एक्साइटेड रहती थी। वह खुद के पैरों पर खड़ी होना चाहती थी। इसलिए उन्होंने UPSC निकालने में पूरी मेहनत लगा दी थी।