दुनिया को अलविदा कह गई पद्मश्री सिंधुताई, भीख मांग 1500 बच्चे लिए थे गोद, सब हो गए अनाथ

पद्मश्री पुरस्कार सम्मानित देश की जानी मानी समाज सेविका सिंधुताई सपकाल उर्फ चिंदी अब इस दुनिया में नहीं रही। 4 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उन्हें महाराष्ट्र की मदर टेरिसा भी कहा जाता था। उनके जाते ही सैकड़ों बच्चे अनाथ हो गए। उन्होंने बीते 40 वर्षों में 1500 से अधिक बच्चों को गोद ले रखा था। उन्होंने कई बाल अनाथ आश्रम की स्थापना की। उनकी बदौलत आज कई अनाथ बच्चे शादी और जॉब कर सैटल हो गए हैं।



सिंधुताई जब 10 साल की थी तभी 30 वर्षीय श्रीहरी सपकाल से उनकी शादी कर दी गई थी। 20 की होते-होते वे 3 बच्चों की मां बन गई थी। चौथा बच्चा पेट में था तब झूठ के खिलाफ आवाज उठाने के लिए पति ने उन्हें घर से बेदखल कर दिया था। 9वां महीने का पेट लेकर उन्होंने गाय के लिए बनाए गए फूस के घर में बच्ची को जन्म दिया। वह भीख मांग अपना गुजारा करने लगी।



जब हालात और बिगड़े तो मन में आत्महत्या का विचार आया। मरने से पहले उन्होंने खूब खाया और बाकी खाना पैककर पटरी के सामने आत्महत्या करने निकल पड़ी। रास्ते में उन्हें एक बुजुर्ग भीख मांगता हुआ दिखा तो उन्होंने अपने पास का भोजन उसे दे दिया। बुजुर्ग ने बदले में धन्यवाद कहा। ये पल सिंधुताई की लाइफ का सबसे बड़ा बदलाव साबित हुआ। उन्होंने सोचा कि जब मैं इतने मुश्किल हालातों के बावजूद जिंदा हूँ तो बाकी लोगों को भी इसकी प्रेरणा दे सकती हूँ।



सिंधुताई ने आगे चलकर मोटीवेशनल स्पीच देना शुरू कर दी। इससे उन्हें डोनेशन मिलना शुरू हुए। इन पैसों से उन्होंने 1500 बच्चों से अधिक बच्चों को गोद लिया। पद्मश्री से पहले उन्हें 700 से अधिक सम्मान से नवाजा जा चुका है।